UP समाचार न्यूज / रिपोर्ट आकाश सक्सेना / खबर बदायूं यूपी..
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| बदायूं विकास भवन स्थित जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय के दूरी स्थित सरकारी प्रचार प्रसार. समाग्री को जलाकर हाथ तापते लोग... |
संक्षेप...
बदायूं में बुधवार को एक वीडियो शोसल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमें विकास भवन स्थित जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) कार्यालय समीप बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग संबंधित प्रचार प्रसार के पोस्टर सामग्री कार्यालय के बाहर बरामदे में बैठे लोग अंगीठी में पोस्टर जलाकर हाथ ताप रहे थे जिसका वीडियो शोसल मीडिया पर अब वायरल हो गया है...
यूपी समाचार न्यूज बदायूं। विकास भवन में संचालित जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) कार्यालय के पास उस समय बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए, जब सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए छपवाए गए विज्ञापन पोस्टरों को जलाकर ठंड से हाथ सेंकने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद विभागीय लापरवाही और सरकारी सामग्री के दुरुपयोग को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं।
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जानकारी के अनुसार, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की आईसीडीएस योजनाओं से संबंधित सरकारी विज्ञापन पोस्टर कार्यालय के समीप खुले स्थान पर रखे थे। कुछ पोस्टर एक प्लास्टिक के थैले में रखे थे, जबकि कई जमीन पर बिखरे पड़े थे। कड़ाके की ठंड के बीच कुछ लोग वहां एकत्र हुए और लोहे की अंगीठी नुमा बर्तन में इन पोस्टरों को डालकर आग जला ली। मौके पर मौजूद लोगों ने आग तापी और पूरी घटना किसी के मोबाइल कैमरे में कैद हो गई, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।
वीडियो वायरल होने के बाद आनन-फानन में मौके से लोहे की अंगीठी और बचे हुए सरकारी पोस्टरों को हटा दिया गया। हालांकि, तब तक मामला आमजन के बीच चर्चा का विषय बन चुका था। सरकारी योजनाओं के प्रचार के लिए छपवाए गए पोस्टरों को इस तरह जलाना न केवल सरकारी धन की बर्बादी माना जा रहा है, बल्कि इससे विभागीय निगरानी व्यवस्था की भी पोल खुलती नजर आई।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के अंतर्गत संचालित आईसीडीएस योजनाओं की जिम्मेदारी जिला स्तर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी के पास होती है, जो जिलाधिकारी के पर्यवेक्षण में कार्य करते हैं। साथ ही बाल विकास परियोजना अधिकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी की अहम जिम्मेदारी निभाते हैं। ऐसे में विभागीय कार्यालय के ठीक पास ही सरकारी प्रचार सामग्री का इस तरह इस्तेमाल होना व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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फिलहाल वीडियो वायरल होने के बाद विभागीय स्तर पर इस बात पर नजरें टिकी हैं कि मामले को दबाने का प्रयास किया जाएगा या प्रशासन इसे औपचारिकता मानकर छोड़ देगा। लोगों की मांग है कि जिम्मेदारों की पहचान कर उनके खिलाफ ठोस कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में सरकारी संसाधनों का इस तरह दुरुपयोग न हो।



