UP समाचार न्यूज़ /रिपोर्ट आकाश सक्सेना /खबर बदायूं यूपी
संक्षेप..
200 करोड़ से अधिक की ठगी के आरोपी अमर ज्योति कंपनी के दोनों भाई गिरफ्तार नोएडा एसटीएफ और बदायूं पुलिस की संयुक्त कार्रवाई शशिकांत-सूर्यकांत पर था 50-50 हजार का इनाम,निवेशकों की गाढ़ी कमाई लेकर फरार अमर ज्योति के दोनों निदेशक दबोचे,सैकड़ों निवेशकों से रकम जमा कराने के बाद बंद कर दिया था कंपनी का कार्यालय
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बदायूं। अमर ज्योति यूनिवर्स निधि लिमिटेड के नाम पर निवेशकों से करोड़ों रुपये की ठगी के मामले में लंबे समय से फरार चल रहे कंपनी के निदेशक शशिकांत मौर्य और उसके भाई सूर्यकांत मौर्य को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया। एसटीएफ नोएडा यूनिट और बदायूं कोतवाली पुलिस की संयुक्त टीम ने सात सितंबर को दोनों को गिरफ्तार किया। दोनों पर डीआईजी बरेली की ओर से 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार करने के बाद मामले में अग्रिम कार्रवाई शुरू कर दी है।
बदायूं में खोली थी कंपनी, एजेंटों के जरिये जमा कराए रुपये
पुलिस के मुताबिक बरेली के कटरा चांद खां निवासी शशिकांत मौर्य और सूर्यकांत मौर्य ने बदायूं में अमर ज्योति यूनिवर्स निधि लिमिटेड के नाम से कार्यालय खोला था। कंपनी के माध्यम से लोगों को निवेश के लिए आकर्षित किया गया। इसके लिए एजेंटों का नेटवर्क तैयार किया गया था। एजेंटों के जरिये निवेशकों से रकम जमा कराई जाती रही। पूर्व की पुलिस कार्रवाई में सामने आया था कि कंपनी से जुड़े एजेंटों की संख्या बड़ी थी और बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी जमा पूंजी निवेश की थी।
बताया गया कि कंपनी में लंबे समय तक लोगों की रकम जमा होती रही। निवेशकों को जब अपनी रकम वापस मिलने की उम्मीद थी, उसी दौरान कंपनी के संचालक कथित तौर पर रकम लेकर फरार हो गए। मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार ठगी की रकम 200 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। अलग-अलग जिलों के निवेशकों से रकम लिए जाने के कारण मामले का दायरा और बड़ा होने की बात भी सामने आती रही है।
निवेशकों ने शुरू किया विरोध, कई मुकदमे हुए दर्ज
कंपनी के अचानक बंद होने और निवेश की रकम वापस न मिलने पर निवेशकों में आक्रोश फैल गया था। बड़ी संख्या में निवेशकों ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। बदायूं में कंपनी और उसके संचालकों के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हुए। निवेशकों की शिकायतों के बाद पुलिस ने कंपनी से जुड़े एजेंटों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की। अप्रैल 2026 तक पुलिस कई एजेंटों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी थी।
मामले में बदायूं के अलावा बरेली में भी रिपोर्ट दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। बरेली के बारादरी थाने में भी दोनों भाइयों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ है। पुलिस अब दोनों आरोपियों से पूछताछ कर ठगी के पूरे नेटवर्क, निवेशकों से जुटाई गई रकम और उससे संबंधित अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटा सकती है।
हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली तो गिरफ्तारी का रास्ता साफ हुआ
दोनों आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए न्यायालय की शरण में गए थे। अप्रैल 2026 में हाईकोर्ट से उन्हें राहत नहीं मिलने के बाद पुलिस के लिए गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया था। इससे पहले दोनों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 50-50 हजार रुपये कर दिया गया। दोनों की गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ को भी लगाया गया था।
पुलिस की लगातार तलाश के बावजूद दोनों काफी समय तक हाथ नहीं आए। जुलाई 2026 तक दोनों पुलिस और एसटीएफ की पकड़ से बाहर थे। अब एसटीएफ नोएडा यूनिट और बदायूं कोतवाली पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में दोनों की गिरफ्तारी हो गई है। पुलिस के अनुसार दोनों बरेली के कटरा चांद खां के रहने वाले हैं और उनके खिलाफ बदायूं कोतवाली में धोखाधड़ी समेत गंभीर धाराओं में मामले दर्ज हैं।
अब पूछताछ में खुलेंगे ठगी के राज
दोनों भाइयों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की पूछताछ में कंपनी के संचालन, एजेंटों के नेटवर्क, निवेशकों से जमा कराई गई रकम और रकम के इस्तेमाल से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की उम्मीद है। साथ ही अन्य आरोपियों और मामले से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच आगे बढ़ सकती है। मामले में निवेशकों को अपनी रकम वापस मिलने की उम्मीद भी जगी है।

