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यूपी समाचार न्यूज़ / एजेंसी। अमेरिका के यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन ने 2017 में उद्योगपति अनिल अंबानी के सामने खुद को डोनाल्ड ट्रम्प के पहले कार्यकाल के व्हाइट हाउस के ‘इनसाइडर’ की तरह पेश किया था। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों के बीच दो साल तक सैकड़ों मैसेज और ईमेल हुए।
इनमें एपस्टीन ने ट्रम्प प्रशासन की नियुक्ति व विदेश नीति से जुड़ी जानकारियां साझा कीं, जो बाद में सही भी निकलीं। हालांकि, इस बात का कोई सबूत नहीं मिला कि एपस्टीन की व्हाइट हाउस तक सीधी पहुंच थी।
मैसेज में अनिल अंबानी ने एपस्टीन को लिखा था- ‘भारत के रिश्ते और रक्षा सहयोग के लिए व्हाइट हाउस से डील करने में आपकी गाइडेंस चाहिए।’ जवाब में एपस्टीन ने ‘इनसाइड’ जानकारी देने का वादा किया।
न्यूयॉर्क टाइम्स ने जस्टिस डिपार्टमेंट की तरफ से जारी मैसेज के रीव्यू के आधार पर बताया कि अनिल अंबानी और एपस्टीन के बीच बातचीत सिग्नल और टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म पर होती थी, जहां अंबानी ‘अरमानी ए’ नाम से सक्रिय थे।
यह संपर्क उस दौर का है, जब एपस्टीन नाबालिगों से जुड़े अपराधों में जेल की सजा काट चुका था। इनका परिचय दुबई की कंपनी डीपी वर्ल्ड के चेयरमैन सुल्तान अहमद बिन सुलायेम ने कराया था। एपस्टीन ने जब दीपक चोपड़ा से अंबानी के बारे में राय मांगी, तो चोपड़ा ने उन्हें ‘बेहद अमीर, चर्चा में रहने का शौकीन और सेलेब्स के प्रति सजग’ व्यक्ति बताया था।
मैसेज में एपस्टीन खुद को असरदार पावर ब्रोकर के रूप में पेश करता दिखा। मार्च 2017 में अनिल अंबानी ने एपस्टीन से पूर्व सीआईए डायरेक्टर डेविड पेट्रेयस के भारत में अमेरिकी राजदूत बनने की संभावना पूछी थी।
एपस्टीन ने जवाब दिया था- वे प्राथमिकता में नहीं हैं। बाद में केनेथ जस्टर राजदूत बने। जुलाई 2017 में एपस्टीन ने यह ‘इनसाइड’ जानकारी भी दी कि जॉन बोल्टन नए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) होंगे। हालांकि, तब ट्रम्प ने मौजूदा NSA मैकमास्टर का बचाव किया था।
हालांकि, 8 महीने बाद एपस्टीन की बात सच साबित हुई और बोल्टन ने ही पद संभाला। एपस्टीन ने अनिल अंबानी को ट्रम्प के बेहद करीबी लोगों, जैसे स्टीफन बैनन और थॉमस बैरक जूनियर से मिलवाने का प्रस्ताव दिया था।
